कोरबा।।

कोरबा के कटघोरा वन मंडल के पनगवा कंजर पहाड़ इलाके में 11 केवी विद्युत लाइन के संपर्क में आने से लगभग 20 साल के हाथी की मौत हो गई थी। वन विभाग के इस निष्क्रियता से दंतैल की मौत हो गई। यह मामला कोई पहेली दफा नही हैं। पूर्व से लेकर आज तक के स्थापित डीएफओ के द्वारा वन्य जीवों के संरक्षण के लिए कोई विशेष पहल नही किया गया हैं। शासन से आने वाले मदो का यह सीधा सीधा दुरपयोग हैं। अधिकारी भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने में लगे हैं। यह कोई पहला मामला नही हैं कि हाथी की मौत हुई हो,इस तरह की अनेको घटना कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत आये दिन देखने को मिलते हैं।
बात करे वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के तहत मिलने वाले मद से जीवो के संरक्षण के लिए कोई आवश्यक पहल नही की गई हैं।
संरक्षण के नाम पर मद का सिर्फ बंदरबाट ही होता रहा हैं। जबकि वास्विकता सिर्फ कागजो में अंकित हैं।
इस तरह के मामलों को अगर वनविभाग द्वारा पूर्व में घटित घटना के बाद गंभीरता से लिया गया होता तो निश्चित ही आज इस तरह की घटनाएं नही होती। आये दिन वन्य प्राणी के मौत से यह साफ दिखाई देता हैं कि विभाग अपने कार्य मे कितना निष्क्रियता दिखाते हैं।
:- डीएफओ ने यह कहकर पल्ला झाड़ा-:
डीएफओ ने वन्य जीव संरक्षण अधिनियम के अंतर्गत जांच कार्रवाई करने की बात कही थी। बीते दिन सोमवार को कटघोरा वन मंडल के पसान वन परिक्षेत्र में हाथी की मौत हो गई थी। जिसमे बताया गया कि समय पर विद्युत लाइन को ठीक नही किए जाने से यह घटना हुई हैं।
जानकारी के अनुसार मृत दंतैल हाथी घटनास्थल पर कुछ दिनों से सक्रिय था। वहीं इस इलाके से छत्तीसगढ़ विद्युत वितरण कंपनी की 11 केवी क्षमता वाली विद्युत लाइन गुजरती है। कुछ समय से ये बिजली की लाइन के झूलने से संभावित खतरा बना हुआ था और इस बीच हाथी की मौत हो गई। डीएफओ कुमार निशांत ने बताया कि हाथी के सिर का संपर्क बिजली तार से होने के कारण उसकी जान चली गई।
बताते चले कि विभाग अपनी गलतियों को छुपाने के लिए अपना ठीकरा दूसरे के सिर पर फोड़ रही हैं।
“बिल्कुल इस मुहावरे की तरह”
नाच न जाने आँगन टेढ़ा
यह कहावत वनविभाग के जिम्मेदार अधिकारियों के ऊपर सटीक बैठती हैं।
अधीक्षण अभियंता श्री पीएल सिदार (कोरबा) ने बताया कि जहाँ हाथी की मौत हुई हैं वह घटनास्थल हाथी विचरण क्षेत्र नही हैं। चूंकि अगर 11kv तार वहाँ से गुजरी हैं वहाँ मौके पर हाथी की उपस्थिति की कोई जानकारी नही दी गईं हैं।
अगर वनविभाग के द्वारा किसी प्रकार की सूचना दी गई होती तो निःसन्देह बिजली प्रवाहित तार को बंद किया जाता।
अब सवाल यह उठता हैं कि
:- वन विभाग को किसका संरक्षण प्राप्त हैं। जो अपनी किये गलती का ठीकरा किसी अन्य विभाग में के सिर फोड़ रहा हैं।
:- क्या वनविभाग की इस बात की जानकारी ही नही थी कि वहाँ हाथी की उपस्थिति हैं। अगर जानकारी होती तो बिट गार्ड, रेंजर,अधिकारी कर्मचारी के द्वारा करंट प्रवाहित तार को बंद कराया जाता।
यह बताना जरूरी होगा कि
:-वन परीक्षेत्र में गुजरे 11 kv के है तार को जंगलों के बीच से गुजारने के लिए अनुमति किसने दी थी। वनविभाग के द्वारा अनुमति देने के बाद ही यहां से विद्युत वितरण विभाग द्वारा तार ले जाया गया*
:- अगर विभाग को इस बात की जानकारी थी कि दंतैल हाथी उस स्थान पर सक्रिय हैं तो उसने जानकारी विधुत विभाग क्यो नही दी..??
:- अगर वनविभाग को दंतैल हाथी जानकारी पहले से ही थी तो मौत से पहले हाथी को वहां से भगाया क्यो नही गया।
:- सवाल बहुत हैं पर ये सवालो का जवाब जिम्मेदार विभाग देने से कतरा रहे हैं। इसलिए हाथी के मौत का जिम्मेदार विधुत विभाग के ऊपर थोप दिया गया।




