कोरबा।।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग ने प्रदेश के सभी नगरीय निकायों को स्पष्ट निर्देश जारी किया है कि जिन अधिकारियों-कर्मचारियों का स्थानांतरण हो चुका है, उन्हें किसी भी बहाने से न रोका जाए।
विभाग का कहना है कि ट्रांसफर आदेश जारी होने के बाद कई निकायों में कार्यमुक्त न करने, अभ्यावेदन के नाम पर रोकने और मनमाने तरीके से रिलीव में देरी करने की शिकायतें मिल रही थीं। इसी को लेकर यह निर्देश जारी किया गया है।
क्या है निर्देश
1. जिनका ट्रांसफर आदेश जारी हो चुका है, उन्हें तत्काल कार्यमुक्त किया जाए।
2. अभ्यावेदन या कोर्ट में याचिका के नाम पर ट्रांसफर को रोका न जाए, जब तक कोर्ट की ओर से कोई स्थगन आदेश न हो।
3. यदि किसी कर्मचारी ने हाईकोर्ट से सिर्फ अभ्यावेदन देने की अनुमति ली है, तो उसे ट्रांसफर पर रोक नहीं माना जाएगा।
4. रिलीव न करने वाले आयुक्त / सीएमओ पर कार्रवाई होगी।
कोरबा से जुड़ा मामला –
कोरबा नगर निगम में पदस्थ सब-इंजीनियर पीयूष राजपूत के मामले में भी यही स्थिति सामने आई थी। हाईकोर्ट ने
*WPS/5701/2024* में सिर्फ 10 दिन में अभ्यावेदन देने और 30 दिन में निर्णय लेने को कहा था, ट्रांसफर पर रोक का कोई आदेश नहीं दिया था। इसके बावजूद रिलीव को लेकर
और 30 दिन में निर्णय लेने को कहा था, ट्रांसफर पर रोक का कोई आदेश नहीं दिया था। इसके बावजूद रिलीव को लेकर असमंजस बना रहा।
विभाग ने स्पष्ट किया है कि हाईकोर्ट के इस तरह के आदेश का मतलब ट्रांसफर रुकना नहीं होता।
अब क्या होगा –
सभी निकायों को 48 घंटे के भीतर ट्रांसफर किए गए कर्मचारियों की रिलीव रिपोर्ट संचालनालय को भेजनी होगी।








