कोरबा// अवैध रेत परिवहन में ट्रैक्टर पलटा,चालक की मौत…पढ़ें पूरी खबर

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कोरबा।

दफन मुर्दों को कब्र से बाहर निकालते तो कभी जिंदा लोगों को रेत की कब्र में दफन करते रेत के चोरों-तस्करों और कथित रेत माफियाओं के हौसले पस्त नहीं हो रहे। मामूली कार्यवाही के बाद इन्हें मिलता अभयदान नदी के सोना को चोरी करने का मनोबल बढ़ाने के साथ-साथ सरकार को बड़े राजस्व के नुकसान की ओर धकेल रहा है। कहने को तो चंद जनप्रतिनिधि आम जनता के साथ विरोध की बात करते हैं लेकिन चंद मिनटों के बाद विरोध का यह स्वर टांय-टांय फिस्स हो जाता है। इसके पीछे रेत चोरों के साथ संबंधितों का रिश्ता आखिर क्या कहलाता है? पुलिस ने तो अवैध रेत के मामलों की धरपकड़ से हाथ खींच लिया है और अपना काम नहीं बताया है। दूसरी तरफ माइनिंग के पास अमले की कमी है। बकौल माइनिंग इंस्पेक्टर विभाग कार्यवाही तो करता है लेकिन कहां-कहां और कितना कार्यवाही करें!अमला हमारे पास कम है। अब यह अमले का रोना और पुलिस का हाथ खींच लेना, राजस्व अधिकारियों के द्वारा की जाने वाली अनदेखी आखिर किसलिए? जबकि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने स्पष्ट तौर पर रेत, मुरुम सहित अन्य खनिज की चोरी रोकने के लिए जिम्मेदारियां तय की है। निर्देश के बाद खनिज,राजस्व, पुलिस अमला मुस्तैद हुआ लेकिन बाद में सब बिखर गए।

कुदुरमाल में हुई मौत

रेत के अवैध खनन व परिवहन के दौरान एक युवक की मौत हो गई।
मिली जानकारी अनुसार यह हादसा गुरुवार रात उरगा थाना क्षेत्र अंतर्गत कुदुरमाल में नदी किनारे से रेत खनन व परिवहन कर पहुंचाने की जल्दबाजी के दौरान ट्रैक्टर-ट्रॉली असंतुलित होकर पलटने से हुआ। गहरे खेत में पलटी ट्रैक्टर-ट्राली के नीचे दबकर चालक की मौत हो गई। मृतक गौतम कुमार धनुहार पिता पंच राम उम्र लगभग 26 वर्ष ग्राम परसाभवना निवासी बताया जा रहा है। बता दें कि इन दिनों रेत चोरी के लिए होड़-सी मची हुई है। खासकर सीतामढ़ी स्थित मोतीसागरपारा के रेत घाट और इससे लगे भिलाई खुर्द, बरबसपुर दूसरी तरफ बरमपुर, छिरहुट,खोलर नाला, डुड़गाऔर इसके आसपास के नदी तट से जिस पैमाने पर रेत की चोरी हो रही है उससे सांठगांठ कहना गलत नहीं होगा। एक-दूसरे की देखा-देखी दूसरे लोग भी रेत के कारोबार में हाथ आजमा रहे हैं। धरपकड़ उन्हीं मामलों में हो रही है जो या तो बदकिस्मती से पकड़े जाएं या फिर किसी ने मुखबिरी की हो। खनिज विभाग अपने दफ्तर का कामकाज निपटाए या फिर चंद इंस्पेक्टरों के भरोसे रेत चोरी की धरपकड़ में मशगूल रहे।

बता दें कि कुछ माह पहले ही मोती सागरपारा सीतामढ़ी के घाट में घुसकर कब्रों को तोड़ फोड़ कर दफन लाशों को बिखेरकर भावनाओं को आहत करने का काम चोरों के सिंडिकेट ने किया था। कोतवाली पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया। मामला जमानती होने के कारण मृतकों के परिजन, रेत चोरों ने आपस में मामला निपटा लिया। कुछ दिन रुकने के बाद यह सिलसिला फिर चल निकला लेकिन रास्ता बदल दिया गया।

जहां 3 मासूमों की बनी समाधि वहीं फिर से खनन

इसी तरह कोरबा जनपद पंचायत के अंतर्गत आने वाले ग्राम बरीडीह, जहां लगभग 3 साल पहले अवैध तरीके से खोदे जा रहे रेत के कारण बने गड्ढे में तीन मासूम बच्चों की जान चली गई,वहां गड्ढे की आड़ में बड़े-बड़े कारनामे हो गए। यह बरीडीह अब फिर से रेत चोरी के लिए सुर्खियों में है। हालांकि इस मामले में खनिज विभाग के अधिकारी के संज्ञान में लाए जाने पर उन्होंने निरीक्षण और कार्यवाही की बात नहीं है। दूसरी और चिंताजनक बात है कि आखिर रेत माफियाओं के हौसले इतने बढ़े हैं और फिर वहां से रेत चोरी करने का काम कर रहे हैं। ना तो इन्हें पंचायत रोकती है न वार्ड के पार्षद रोकते हैं और ना ही जिम्मेदार लोग।
गुरुवार को सुबह ही मोतीसागरपारा वार्ड के पार्षद संतोष लांझेकर ने सूचना दी कि वार्ड की महिलाओं में रेत चोरों के विरुद्ध आक्रोश पनप रहा है और वे विरोध कर रहे हैं, लेकिन कुछ देर के बाद यह विरोध कहां और कैसे शांत हो गया इसकी भनक तक नहीं लगी। कहीं से भी विरोध की खबर नहीं गूंजी।

डाला बॉडी को ऊंचा कर ओव्हरलोड रेत परिवहन

कुछ शातिर रेत चोरों ने तो ट्रैक्टर की धरपकड़ से बचने के लिए टीपर का उपयोग करना शुरू कर दिया है लेकिन टीपर में भी डाला बॉडी को ऊंचा कर इसकी आड़ में ओवरलोड रेत लोड कर चोरी किया जा रहा है। चोरी की यह रेत निजी से लेकर सरकारी कार्यों में खपत हो रही है। नगर निगम सहित विभिन्न सरकारी निर्माण कार्यों का हवाला देकर रेत पर रेत ढोई जा रही है लेकिन इसे अलग-अलग भंडारण क्षेत्रों में डंपिंग करने के बाद आने-पौने दाम पर बेचा जा रहा है। रेत खनिज की चोरी रोकने और राजस्व की हानि को कम करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशानुरूप किसी तरह का ठोस कार्य होता नजर नहीं आ रहा है