कटघोरा वनमंडल में आये दिन हो रहे हाथियों के मौत…विभाग के अधिकारियों पर उठ रहे सवाल…आखिर ऐसी क्या मजबूरी..? घटनाओं को रोकने में विभाग नकाम

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(कोरबा)

कटघोरा फारेस्ट डिविजन के अंतर्गत वन परिक्षेत्र पसान में शामिल पनगंवा में हाथी की करंट से मौत हो गई। जल्के सर्किल के बैगापारा खंजरपार में वह मृत स्थिति में मिला। जल्के तनेरा सर्किल के डिप्टी रेंजर अनिल कश्यप ने बताया कि शुरुआती तौर पर यही चीज स्पष्ट हुई है कि हाथी दुर्घटना में मृत हुआ है।

घटना स्थल को लेकर तथ्यों के आधार पर इस प्रकार की बात कही जा रही है। वनमंडल के अधिकारियों को इस बारे में अवगत करा गया है। उन्होंने इस पर संज्ञान लेने और जल्द ही उनकी उपस्थिति प्रभावित क्षेत्र में दर्ज होने की बात कही गई हैं। आगे की जांच पड़ताल के साथ पूरे मामले की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी कि यह स्वाभाविक दुर्घटना थी या फिर इसमें किसी तरह की साजिश शामिल रही।



याद रहे इससे पहले  कटघोरा वनमंडल के अंतर्गत कई ऐसी घटनाएं होती रही है जिसमें वन प्राणियों को अपनी जान गंवानी पड़ी। पूर्व में भी रहे कटघोरा डीएफओ के द्वारा इस तरह के घटनाओँ में किसी तरह का कोई सज्ञान नही लिया गया था। आज नए डीएफओ के पदस्थापना के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई हैं। आये दिन हो रहे इस तरह के दुर्घटना इस सिलसिले में तत्कालीन वनमंडलाधिकारी को संज्ञान में लेना चाहिए।

:– क्या मिलने वाले फंड को सिर्फ कागजों में दर्शाया जा रहा हैं..?

विभाग को वन्य जीवो के संरक्षण  के लिए करोड़ों के फंड को रिलीज किया जाता हैं। पर विभाग के आपसी मिली भगत व अपने पंसदीदा ठेकेदारों द्वारा काम देकर बंदरबाट कर लिया जाता हैं। जिससे इसके सही मायने में कार्यों का धरातल पर कोई कार्य नही दिखता हैं।

इस घटना में आसपास के लोगों की भूमिका का पता चला था जो अपनी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के कारण परेशान थे ,और उन्होंने हिसाब चुकता करने के लिए कई प्रकार के हथकंडों पर काम किया। पर विभाग के द्वारा अगर वन्यजीवो के लिए सही मायने में कार्य किया जाए तो निश्चित ही ग्रामीणों को होने वाली नुकसान व जन हानि से बचाया जा सकता हैं।