वनमण्डल कटघोरा में भ्रष्टाचार और मजदूरी भुगतान की शिकायत मानो जड़ जमा लिया हो जिसे जड़मुल खत्म करने किसी अनुभवी वनमंडलाधिकारी की पदस्थापना जरूरी सा हो गया है।
कोरबा/कटघोरा।
पूर्व में वनमंडलाअधिकारी कटरा शमा फारुकी द्वारा विभागीय कार्यों में कसवट् लाया गया ठेकेदारी प्रथा जो वनमंडला कटघोरा में काफी लबे समय से चला आ रहा था उसे समाप्त करने का प्रयास किया गया था लेकिन वर्तमान में प्रेमलता यादव के बाद भ्रष्टाचार और कमीशनखोरी चरम सीमा पर कर रही है लंबित मजदूरी भुगतान की शिकायत कम होने का नाम नहीं परंतु ।भुगतान के एवज में कमीशनखोरी की जो परिपाटी यादव ने चालू किया है देखना होगा इस प्रथा को कौन समाप्त करता है या उसे दुगुना कर ठेकेदार व सप्लायरों के नाक में दम कर के रखी है।
मजदूरी भुगतान में भी 50 प्रतिशत कमीशन की मांग करने लगी है। श्रीमती यादव को आए महज साल भर ही हुए हैं इतने में ही भ्रष्टाचार और कमीशन खोरी सुरसा का मुंह बन चुका है ।वर्षो से लटके सप्लायरों के भुगतान फाइल धूल खा रही है सिर्फ इसलिए कि इनके मंशानुरूप कमीशन की डीलिंग नही हो पा रही है।जिस ठेकेदार का डीलिंग हो जाए तो बिना काम देखे भुगतान हो जा रहा है । एतमानगर रेंज के एक विवादित स्टॉप डेम लुदी नाला जिसका स्थल पर अस्तित्व भी नही नजर आता ऐसे कार्य का भुगतान पिछले नवंबर माह में किया गया ।
लंबित करोड़ों रुपए के मजदूरी भुगतान में अकेले जटगा रेंज का 50 लाख के आसपास इन्ही के कार्यकाल का लंबित है जिसमे 200 से अधिक पंडो,बिरहोर और धनुहार जाति के मजदूर हैं जो अपने 4-4 माह के मजदूरी पाने के लिए जटगा रेंज से लेकर वनमण्डल कटघोरा का चक्कर लगा लगा कर थक चुके हैं।पुराने कार्यों में रायपुर के एक ठेकेदार का एत्मानगर रेंज अंतर्गत खोदे गए तालाब में 25 लाख के सत्यापन के बाद भी 39 लाख का भुगतान कर दिया गया जो चर्चा में है ।
इसी तरह कटघोरा रेंज के एसईसीएल क्षेत्र में खोदे गए तालाब का रायपुर के एक अन्य ठेकेदार को 64 लाख का भुगतान बिना देखे, जांच कराए कर दिया गया । चैत्मा रेंज के सपलवा से छिंदपहरी मार्ग 3 किमी डब्ल्यू बी एम कार्य में शिकायत के बाद भी बिना जांच कराए 25 लाख रुपए निकाल दी, ये कार्य भी रायपुर के ही किसी ठेकेदार के माध्यम से होना बताया जा रहा है जिसमे मिट्टी कार्य के लिए 13लाख रुपए निकाला गया है जबकि मिट्टी का कार्य 1 घन मीटर भी नही हुआ है ।वर्तमान में चैतमा रेंज में ही छिंदपहरी से रामाकछार 9 किमी डब्ल्यू बी एम का कार्य प्रगति पर है जिसकी लागत 1करोड़ 36 लाख बताई जा रही है । कार्य की गुणवत्ता के क्या कहने ऐसा लग रहा है कि 1लाख रुपए भी प्रत्येक किमी खर्च हो रहा हो तो बहुत बड़ी बात है क्योंकि मजदूरों ने बताया कि बोल्डर तोड़ने का काम मजदूर वहीं मार्ग के दोनो ओर जंगल में 1000 रुपए प्रति ट्रैक्टर के हिसाब से कर रहे है ,मिट्टी का कार्य तो है ही नही तथा अगल बगल से मुरूम खोदकर सीधा रोड में जेसीबी से बिछाया जा रहा है । इतने भर्रा शाही तो आज तक किसी भी डीएफओ के कार्यकाल में न देखा गया न सुना गया । श्रीमती यादव डीएफओ के ऊपर न तो किसी के शिकायत का कोई असर होता और न ही उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन करते देखा गया ,ऐसे हठ धर्मी और मनमानी करने वाले डीएफओ के कार्यों पर अंकुश नहीं लगाया गया तो इतने बड़े वनमण्डल कटघोरा का केवल नाम ही रह जायेगा ।




